CDAC का फुल फॉर्म क्या होता है ?

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CDAC ka Full Form Kya Hota Hai

देश में कई ऐसे काम हैं, जो इंटरनेट के जरिए पूरे किए जाते हैं। वहीं इंटरनेट के जरिए काम पूरा करने के लिए इंटरनेट में सॉफ्टवेयर इलेक्ट्रॉनिक्स और नेट की जरूरत होती है, जिसके आधार पर कंप्यूटर चलाया जाता है और सभी काम पूरे होते हैं। वहीं, सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में इसकी कई कंपनियां हैं, जो सॉफ्टवेयर पर काम करती हैं। इसी तरह सी-डैक भी एक कंपनी है, जो मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी और जानी-मानी कंपनी बताई जाती है। आज हम बात करेंगे CDAC क्या होता है, CDAC का फुल फॉर्म क्या होता है, CDAC को हिंदी में क्या कहते हैं ,इसके बारे में हम आपको संपूर्ण जानकारी देंगे।

CDAC का फुल फॉर्म

सी-डैक का फुल फॉर्म “Centre for Development of Advanced Computing” होता है | हिंदी में “सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटिंग” कहा जाता है |

CDAC का क्या मतलब

C-DAC भारत में एक अर्ध-सरकारी सॉफ्टवेयर कंपनी है, जिसकी शुरुआत मुख्य रूप से स्वदेशी कंप्यूटर कंप्यूटर बनाने के लिए की गई थी। वहीं वर्तमान समय में भाषाई संगणना से संबंधित विकास कार्यों के लिए हिन्दी जगत में यह मुख्य रूप से प्रचलित है। इसके साथ ही सेंटर फॉर एडवांस्ड कंप्यूटिंग डेवलपमेंट को सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी कंपनी कहा जाता है।

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सी-डैक (CDAC) की शाखाएँ

  • सी-डैक पुणे (मुख्यालय)
  • सी-डैक बैंगलोर
  • सी-डैक चेन्नई
  • सी-डैक दिल्ली[2]
  • सी-डैक हैदराबाद
  • सी-डैक कोलकाता
  • सी-डैक मोहाली
  • सी-डैक मुंबई
  • सी-डैक नोएडा
  • सी-डैक जयपुर?[3]
  • सी-डैक तिरुवनंतपुरम [4]
  • सी-डैक सिलचर
  • सी-डैक इंदौर

सी-डैक (CDAC) की परियोजनाएँ

  1. सी-डैक ने इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड का विकास किया। फिलहाल इसके नए वर्जन पर भी काम किया जा रहा है।
  2. बॉस लिनक्स एक उन्नत भारतीय भाषी लिनक्स वितरण (ऑपरेटिंग सिस्टम) है।
  3. Openoffice.org विंडोज और लिनक्स के लिए हिंदी स्थानीयकरण।
  4. इंडिएक्स: लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक संशोधित एक्स सर्वर जो भारतीय भाषी फोंट प्रस्तुत करता है।
  5. सेतु: हिंदी प्रश्नों के माध्यम से अंग्रेजी दस्तावेजों का उपयोग करने की अनुमति देता है।
  6. गरुड़: एक राष्ट्रव्यापी गणना ग्रिड जो पूरे भारत में 17 शहरों को जोड़ता है।
  7. MaTra: एक पूरी तरह से स्वचालित अंग्रेजी से हिंदी मशीन अनुवाद प्रणाली |
  8. ग्लिब: एक ग्राफिक्स लाइब्रेरी |
  9. विज़ुअलाइज़ेशन: एक दस्तावेज़ देखने की प्रणाली।
  10. वेद: एक ऑनलाइन परीक्षण प्रणाली |
  11. व्यास: एक जनरेटिव टेस्टिंग सिस्टम |
  12. ई-लर्निंग फ्रेमवर्क (ई-शिक्षक)[2] |

AGR का फुल फॉर्म क्या होता है

एजीआर (AGR) का फुल फॉर्म “Adjusted Gross Revenue” होता है। इसका हिंदी में मतलब ‘एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR)’ कहा जाता है,

AGR एक प्रकार का संगठन है, क्योंकि AGR एक ऐसा संगठन है जो टेलीकॉम कंपनियों से संबंधित कार्य करता है। एजीआर संस्था इन कंपनियों से यूसेज और लाइसेंस फीस जमा करने का काम बहुत ही सरलता से करती है। इसके अलावा देश में आज भी कई टेलीकॉम कंपनियां हैं, जो लंबे समय से देश में टेलीकॉम सुविधाएं मुहैया करा रही हैं। ये वे कंपनियां हैं, जिन्हें देश में जारी रखने के लिए संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा दूरसंचार कंपनियों से समायोजित सकल राजस्व (AGR) उपयोग और लाइसेंस शुल्क प्रदान किया जाता है।

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एजीआर से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी

1999 की नई दूरसंचार नीति के तहत समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की अवधारणा पूरी तरह से विकसित की गई थी।

नीति के अनुसार जिन कंपनियों को आवंटित स्पेक्ट्रम के लिए लाइसेंस शुल्क और उपयोग शुल्क का भुगतान करना होता है। वह भुगतान ‘राजस्व हिस्सेदारी’ के रूप में किया जाता है।

अतिरिक्त राजस्व हिस्सेदारी की गणना के लिए उपयोग की जाने वाली राजस्व की राशि को मुख्य रूप से समायोजित सकल राजस्व-एजीआर कहा जाता है।

टेलीकॉम कंपनियों के मुताबिक, एजीआर की गणना मुख्य रूप से टेलीकॉम सर्विसेज से मिलने वाली आमदनी पर करना जरूरी है।

टेलीकॉम कंपनियों से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित करके ही काम करता है।

एजीआर संस्था पर चर्चा क्यों

जब एजीआर निकाय सामने आया, तो दूरसंचार विभाग ने कहा, “एजीआर की गणना एक दूरसंचार कंपनी द्वारा उत्पन्न कुल आय या राजस्व के आधार पर की जाएगी, जिसमें गैर-दूरसंचार स्रोतों से आय जैसे जमा ब्याज और संपत्ति की बिक्री शामिल है। हां, इसीलिए टेलीकॉम कंपनियों ने कहा कि एजीआर की गणना टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली आय के आधार पर ही की जानी चाहिए।

इससे पहले, सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने वर्ष 2005 में गणना की जाने वाली AGR की आधिकारिक परिभाषा को चुनौती दी थी, लेकिन तब दूरसंचार विवाद समाधान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) ने सरकार की स्थापना की। नियम को वैध मान लिया गया और सभी प्रकार की प्राप्तियों को कंपनियों की आय में शामिल कर लिया गया।

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