मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्यौहार क्यों मनाया जाता है जानिए इसका इतिहास 

0
140
Makar Sankranti

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत देश में हर त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति का त्यौहार को हर एक शहर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है इसके अलग-अलग नाम होते हैं 

यह पौष मास में सूर्य से मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है वैसे तो सक्रांति का त्यौहार सक्रांति साल में 12 राशि में अलग-अलग प्रवेश करती है लेकिन मकर और कर्क राशि में प्रवेश करने पर इसका बड़ा महत्व है आपको बता दें कि जब सूर्य की गति बढ़ती है तो सूर्य की गति बढ़ने के कारण दिन बड़े होते हैं। रात छोटी होती है जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है तो रात में बड़ी होती और दिन छोटे होते हैं इसके बाद भी बाप को विस्तार पूर्वक बताएं वाले हैं मकर सक्रांति की क्या कहानी है क्या कथा है इसके बारे में आपको बताएंगे तो चलिए आप उसके बारे में बताते हैं.

मकर सक्रांति की कहानी और इतिहास 

इतिहास की माने तो हिंदू कथाओं के अनुसार इस दिन पर सूर्य अपने पुत्र भगवान शनि के पास जाते हैं वह समय भगवान शनि मकर राशि पर नजर रखा है होते हैं पिता और पुत्र के बीच स्वास्थ्य संबंधों को बनाने के लिए मतभेदों के बावजूद मकर संक्रांति को महत्व दिया गया है ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन पर जब कोई पुत्र अपने पिता से मिलने जाता है तो उन्हें अपने बीच सारी समस्याओं को खत्म करने घर में सुख समृद्धि की अपेक्षा करता है.

इसके अलावा कहानी यह भी है कि भीष्म पितामह से जुड़ी हुई हैं जिन्हें वरदान मिला था किवह अपनी इच्छा से मृत्यु ले सकते हैं जब वह शैया पर लेटे हुए थे तब उत्तरायण के दिन का प्रतीक्षा कर रहे थे और उन्होंने इस दिन अपनी आंखें बंद की और इस तरह से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई तब से यह त्यौहार मकर सक्रांति के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। 

Also Read: Debit Card ko Hindi me Kya Kehte Hai? What is Debit Card in Hindi?

मकर सक्रांति Makar Sankranti से जुड़ी एक पुरानी कथा 

शास्त्रों की माने तो मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु के अंगूठे से निकली देवी गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के ऋषि के आश्रम तक जाकर सागर में मिल जाती थी और भगीरथ के पूर्वज महाराज सागर के पुत्र को मुक्ति प्राप्त हुई इसलिए बंगाल में सागर में कपिल मुनि के आश्रम पर एक विशाल मेला लगाया जाता है।

बंगाल में गंगा सागर में स्नान करने का महत्व 

मकर संक्रांति Makar Sankranti के दिन गंगासागर में स्नान करने का वहां पर बहुत ही बड़ा महत्व है क्योंकि भीष्म पितामह महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद सूर्य की उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते रहे और उन्होंने अपने प्राण मकर संक्रांति Makar Sankranti के दिन ही ताकत है यह भी मानता है कि इस दिन मां यशोदा ने कृष्णा को प्राप्त करने के लिए भी व्रत किया था इसलिए यह तो हार काफी मान्य है.

मकर सक्रांति के दिन गंगा में स्नान करने और दान देने का महत्व 

शास्त्रों की माने तो सूर्य के उत्तरायण होने के दिन मकर सक्रांति कभी बहुत पुण्य माना जाता है इस दिन स्नान करने से आपको सारे पाप धुल जाते हैं इस दिन सूर्योदय से पहले सलाम करने से आपको 10000 गोधन का फल प्राप्त होता है इस दिन कंबल तिल गुड़ के आपको गरीबों को दान करना चाहिए जैसे कि आप पर सूर्य और शनि देव की कृपा होती है यह दिन लोग स्नान करने के लिए प्रयागराज संगम में जाते हैं ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो.

Also Read: DMCA ka Full Form Kya Hota Hai? What is the Full Form of DMCA?

मकर संक्रांति Makar Sankranti की 2023 में पूजा करने का शुभ मुहूर्त 

आपको बता दिया तो हार 15 जनवरी को मनाया जाता है इसके पूजा करने का आरंभ दोपहर 2:40 से लेकर 5:45 होगा।

मकर संक्रांति Makar Sankranti पर पूजा करने की विधि 

यदि अब मकर सक्रांति Makar Sankranti के दिन पूजा करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अलग रहने का नियम पालन करना होगा सबसे पहले पूजा करने के लिए आपको मुहूर्त का पता होना चाहिए। पूजा से पहले अपने पूजा के स्थान को साफ सुथरा कर ले और भगवान सूर्य के लिए यह पूजा की जाती है इसलिए भगवान सूर्य की मूर्ति या फोटो रखी उसके बाद एक थाली में चार काली चार सफेद तिल्ली के लड्डू रखे जाते हैं साथ में कुछ पैसे भी थाली में रख लेते हैं इसके बाद थाली में अलग-अलग सामग्री चावल आटा दाल हल्दी इत्यादि रखे जाते हैं। इस दिन भगवान की सूर्य मंत्र का कम से कम 108 बार 21 या 108 बार उच्चारण किया जाता है.

मकर संक्रांति Makar Sankranti का त्यौहार कैसे मनाया जाता है

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत में हर एक शहर में त्यौहार के नाम से मनाया जाता है तो कहीं इसे खिचड़ी के नाम से मनाया जाता है, तो कहीं लोहड़ी के नाम से मनाया जाता है, यह दिन लोग गुड़ तिल लगाकर किसी नदी में स्नान करते हैं और भगवान सूर्य को जल चढ़ाते हैं उनकी पूजा करते हैं ताकि सूर्य उनकी इस नए साल को खुशी से भरे उनके जीवन में कोई दुख ना हो इस दिन गुड़ तिल फल आदि का दान करते हैं यह दिन कई जगह पर पतंग उड़ाई जाती हैं जिस दिन तिल्ली से बनी खाने का सेवन किया जाता है इस दिन लोग लगाते हैं उनकी बात मानी जाती है.

आपको हमारा द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं यदि आपके पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप इसे शेयर भी कर सकते हैं.

Also Read: Template ko Hindi me Kya Kehte Hai? What is Template in Hindi?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here