म्यूच्यूअल फंड को हिंदी में क्या कहते हैं?

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आप सभी लोगों ने म्यूचुअल फंड mutual funds के बारे में कभी ना, कहीं ना सुना होगा। क्या आप जानते हैं कि mutual funds कैसे काम करता है। अगर आप नहीं जानते हैं तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे बहुत से लोग केवल इनके बारे में सुनते हैं कि मन में कोई कल्पना कर लेते हैं और बिना कुछ जाने इसके बारे में उल्टी-सीधी चीज बोलने लगते हैं जो करना बिल्कुल सही नहीं है। इसलिए आज हम आपको mutual funds के बारे में विस्तारपूर्वक बताएंगे। आपकी सारी गलतफहमी को दूर करेंगे तो चली आपको इसके बारे में बताते हैं.

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है

म्यूच्यूअल फंड mutual funds एक तरह का ऐसा फंड होता है जिसमें बहुत सारे निवेशक पैसा एक साथ पारस्परिक रुप से रखा जाता है धन के इस समूह को सबसे अधिक संभव मुनाफा प्राप्त करने के लिए manage किया जाता है इसे ही मैचुअल फंड कहा जाता है.

आसान शब्दों में कहें तो म्यूच्यूअल फण्ड कई लोगों के पैसे से बने फंड होते हैं, जिसमें निवेश किए गए पैसे को अलग-अलग जगहों पर निवेश किया जाता है, जिससे निवेशकों को उनके पैसे से अधिक लाभ मिल सके।

.म्यूच्यूअल फण्ड का इतिहास

भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार की पहल पर भारत पर यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया यूटीआई Unit Trust of India (UTI) के गठन के साथ भारत में म्युचुअल फंड Mutual Funds 1963 में शुरू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य था छोटे निवेशकों को आकर्षित करना और उन्हें निवेशक बाजार से संबंधित विषयों में बताना। यूटीआई UTI का संगठन संसद के एक अधिनियम के तहत 1963 में किया गया था। इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा की गई थी, और शुरुआती समय में इसने आरबीआई के अंतर्गत काम किया। 1978 में यूटीआई UTI को आरबीआई से अलग कर दिया गया। भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (आईडीबीआई) को आरबीआई के स्थान पर विनियामक (Regulatory) और प्रशासनिक नियंत्रण (Administrative control) का अधिकार मिला. और यूटीआई ने इसके अंतर्गत काम करना शुरू किया ,भारत में म्यूचुअल फंड Mutual Funds के विकास को कई चरणों में बांटा जा सकता है, जैसे कि पहले चरण 1964 से 1987 तक का था जिसमें यूटीआई के पास ₹670000000 का फंड आ चुका था.

इसके बाद 1987 में दूसरा चरण शुरू हुआ इसमें पब्लिक सेक्टरpublic sector फंड की एंट्री शुरू हुई..  इस समय में बहुत सारे बैंकों को म्यूच्यूअल फंड mutual funds बनाने का मौका मिला ,एसबीआई SBI ने पहला NONUTI  म्यूचल फंड बनाया है., दूसरा चरण 1993 में खत्म हुआ और दूसरे चरण के खत्म होते ही AUM यानी की Assets under management ₹6700Cr  से कहीं ज्यादा बढ़कर ₹47004CR हो गया.

 तीसरे चरण की बात की जाए तो इसकी शुरुआत 1993 से शुरू हो चुकी थी जो कि 2003 तक चली इस चरण में प्राइवेट सेक्टर फंड को मंजूरी मिली इस दौर में निवेशकों को म्यूचुअल फंड से ज्यादा विकल्प मिले, यह दौर 2003 में खत्म हो गया था।

चौथा चरण 2003 से शुरू हुआ और आज तक चल रहा है। यूटीआई को दो अलग-अलग चरणों में बांटा गया था। पहला SUTI और दूसरा UTI म्यूचुअल फंड जो SEBI MF के नियमों के अनुसार काम करता था।

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म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार

Mutual funds कई प्रकार के होते हैं इनको हम दो श्रेणी में बांट सकते हैं  पहला संरचना के आधार पर दूसरा asset के आधार पर मैचुअल फंड को बांटा जा सकता है.

A) ए) संरचना के आधार basis of Structure पर म्यूचुअल फंड के प्रकार

1. Open ended mutual fund

इस योजना में निवेशकों को किसी भी समय पर फंड को बेचने खरीदने की अनुमति दी जाती है इसमें funds खरीदने या बेचने की कोई निश्चित अवधी नहीं होती है.

2. Close ended Mutual Funds

इस योजना में निर्धारित परिपक्वताअवधि होती है और निवेशक फंड केवल अवधि के दौरान खरीद सकता है. इस तरह के फंड शेयर मार्केट में शामिल किए जाते हैं जिसके बाद उनको ट्रेडिंग trading के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.

3. Interval Funds(अंतराल फंड्स)

म्यूचल फंड का यह प्रकार ओपन एंड क्लोज एंडेड इन दोनों के साथ मिलकर बनाया गया दोनों कान की सुविधा है इसमें दोनों फंड्स की सुविधाएं दी जाती है.

B) Types of Mutual Funds by Asset

1. Debt funds:इस तरह के फंड्स मैं निवेशक को जोखिम बहुत कम होता है निवेशक सरकारी फ्रेंड और अन्य निश्चित आय में निवेश कर सकता है, जो कि सुरक्षित है.

2. Liquid Mutual Funds:यह भी निवेश करने के लिए एक सुरक्षित विकल्प है लिक्विड फंड कम समय वाले funds में निवेश करते हैं इसलिए अगर आप कम समय के लिए निवेश करना चाहते हैं तो लिक्विड फंड आपकी पसंद हो सकती है.

3. Equity funds: अगर आप लंबी समय के लाभ पाना चाहते हैं तो Equity funds आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है इस Equity funds में जोखिम भी शामिल होता है .

4. Money Market Funds:इस तरह के funds Short term  में निवेशकों के लिए उचित रिटर्न प्राप्त करने के लिए होते है।  सुरक्षित जगह पर निवेश किया जाता है.

5. Balanced Mutual Funds:इस तरह के फंड स्कीम में equity फण्ड और Debt फंड मिलाजुला फायदा मिलता है. इस प्रकार के Funds में जमा हुए फंड को इक्विटी और डैब्ट दोनों जगहों पर ही निवेश किया जाता है.

 म्यूच्यूअल फण्ड के फायदे

आपको बता दें कि आपके द्वारा म्यूच्यूअल फंड में लगा हुआ पैसा विशेषज्ञ द्वारा उनके अनुभव और हुनर के साथ manage किया जाता है.  पैसा लगने से पहले जिस फंड में पैसा लगाते हैं उसकी पूरी तरह से रिसर्च करके जानकारी जुटा लेते हैं। अगर उसके बाद इनके द्वारा दिखाई गई जानकारी के अनुसार आपके पैसे में वृद्धि होती है तो यह आप निवेश करते हैं. सुरक्षित निवेश का मूल मंत्र है कि आप अपने पैसे को एक जगह ना लगाकर बहुत सारी जगह पर लगा दो जिससे कि आपको बहुत सारा फायदा मिल सकता है यही काम mutual फण्ड करता है वह आपके पैसे दो अलग-अलग लगाता है जिससे कि आपको फायदा मिल सके.

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