Friday, October 7, 2022
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रेडियो radio का आविष्कार किसने किया?

आज हम बात करेंगे कि रेडियो radio का आविष्कार किसने किया रेडियो radio सबसे पहले कहां बनाया गया इसके बारे में बताने वाले हैं तो चलिए आपको उसके बारे में बताते हैं। आपको बता दें कि पहले रेडियो radio का उपयोग केवल समाचार प्रसारित करने के लिए किया जाता था. लेकिन बाद में यह मनोरंजन का साधन भी बन गया, आज के लोग रेडियो के आविष्कार का महत्व नहीं समझ पाते, लेकिन अगर उस समय रेडियो का आविष्कार नहीं हुआ होता, तो संचार प्रणाली आज की तरह नहीं होती।

रेडियो क्या है

रेडियो radio क्या है आपने रेडियो radio का नाम सुनते ही आपके दिमाग में फम की तस्वीर छप जाती। होगी लेकिन असल में यह सिर्फ एक मशीन होती है रेडियो की पूरी तकनीकी जिसमें बिना तार के संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाते हैं।

आज के सभी प्रमुख संचार को भी रेडियो radio की तकनीक पर आधारित किया गया है यदि रेडियो को सरल भाषा में समझाया जाए तो यह एक ऐसी तकनीक है जिसके रेडियो radio तरंगे का उपयोग करके एक दूसरे के साथ संकेत दिए जाते हैं और संचार किया जाता है.

आपको बता दें कि हमें रेडियो Radio स्टेशन से लाखों लाखों लोगों को रेडियो तरंगों के माध्यम से संदेश भेज सकते हैं रेडियो Radio तरंगे एक प्रकार की विद्युत चुंबकीय तरंगे होती है जिसकी आवर्ती आवृत्ति 30Hz से 300GHz तक होती है।

रेडियो Radio तरंगे एक ट्रांसमीटर के द्वारा उत्पन्न की जाती हैं जो कि एंटीना से जुड़े होती हैं इन तरंगों को प्राप्त करने के लिए उपकरण में रेडियो Radio रिसीवर लगाए हुए होते हैं। जिसमें एक एंटीना भी होता है। रेडियो Radio वर्तमान में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली आधुनिक तकनीक है. रेडियो Radio नेविगेशन ,रिमोट कंट्रोल, रिमोट सेंसिंग, आदि इसी पर आधारित होते हैं. रेडियो संचार का उपयोग टेलीविजन प्रसारण किया जाता है. रेडियो संचार का उपयोग टेलीविजन प्रसारण, सेल्फी, दोतरफा रेडियो, वायरलेस नेटवर्किंग और उपग्रह संचार आदि में किया जाता है।

रेडियो का अविष्कार

रेडियो का अविष्कार गुग्लील्मो मार्कोनी ने किया था।

आपको बता दें कि यह रेडियो का आविष्कार ने हमारे जीवन को और भी आसान बना दिया उद्योगों के साथ-साथ देश की रक्षा के लिए भी रेडियो तकनीक का उपयोग किया जाने लगा. और इसका आविष्कार ने हमारे जीवन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया कई वैज्ञानिक और विद्वानों आज भी पूरी तरह से रेडियो की तकनीक पर ही निर्भर है।

आपको बता दें कि 880 के दशक में हेनरिक रुडोल्फ हर्ट्ज़ द्वारा हेनरिक रुडोल्फ हर्ट्ज़ द्वारा ‘विद्युत चुम्बकीय तरंगों’ की खोज के बाद, गुग्लिल्मो मार्कोनी इस तकनीक का उपयोग करके लंबी दूरी के संचार के लिए एक सफल उपकरण विकसित करने वाले पहले व्यक्ति थे।

आपको बता दें कि 1880 के दशक में विद्युत चुंबकीय तरंगों की खोज की गई थी या खोज हेनरिक्स ने की थी इसके ऊपर एक पुस्तक भी लिखी गई थी जिसमें उनकी सफलताओं के बारे में बताया गया है कि वह इसकी खोज में कितनी बार असफल हुए.

 इस किताब को दुनिया भर के लोगों ने पढ़ा है जिसमें से एक जगदीश चंद्र बसु भी थे बासु ने उस किताब पर ऐसा प्रभाव डाला कि उन्होंने विद्युत चुंबकीय तरंगों पर अधारित एक उपकरण बनाया यह एक विज्ञानिक प्रदर्शन के दौरान दिखाया गया. जिसमें उन्होंने विद्युत चुंबकीय तरंगों के माध्यम से दूर रखिए घंटी को दिखाया उस समय एक काल्पनिक बात थी.

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रेडियो का इतिहास

रेडियो का आविष्कार दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण आविष्कारों में से एक माना जाता है, आज के आधुनिक रेडियो सिस्टम का पूरा श्रेय किसी एक वैज्ञानिक को नहीं दिया जा सकता है, रेडियो के आविष्कार का सबसे बड़ा हाथ वैज्ञानिक जेम्स क्लर्क मैक्सवेल इस पर। उन अग्रदूतों में से एक जो वे करते थे, विद्युत चुम्बकीय तरंगों पर काम करते थे। वह विद्युत चुम्बकीय तरंगों के सटीक सिद्धांत का पता नहीं लगा सके ब्रिटिश वैज्ञानिक ब्रिटिश वैज्ञानिक ओलिवर हेविसाइड ने फिर इस खोज को आगे बढ़ाया।

इसके बाद हेनरिक रुडोल्फ हर्ट्ज़ ने विद्युत चुम्बकीय तरंगों की सफलतापूर्वक खोज की। वह विद्युत चुम्बकीय तरंगों से संबंधित मुख्य प्रश्नों के उत्तर खोजने में सफल रहे। हर्ट्ज़ की खोज के बाद जगदीश चंद्र बसु और ओलिवर लॉज जैसे वैज्ञानिकों ने इस खोज को आगे बढ़ाया।

भारत में रेडियो का इतिहास एवं वर्तमान

भारत में रेडियो का कुल इतिहास लगभग 98 वर्ष पुराना है। 8 अगस्त 1921 को, संगीत कार्यक्रम एक विशेष संगीत कार्यक्रम के साथ शुरू हुआ और मुंबई से पुणे तक की यात्रा की। फिर शौकिया रेडियो क्लब में जाएं। 13 नवंबर 1923 को रेडियो क्लब बंगाल, 8 जून 1923 को बॉम्बे प्राइवेट रेडियो सर्विस क्लब 31 जुलाई 1924 को मद्रास प्रेसीडेंसी रेडियो क्लब बन गया और इन सभी रेडियो सर्विस क्लबों की 1927 में मृत्यु हो गई।

आगे क्या था, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) 23 जुलाई 1926 को एक निजी प्रसारण संगठन बन गई, जिसका उद्घाटन मुंबई के वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया। ये मध्यम तरंग ट्रांसमीटर 1.5 किलोवाट क्षमता के थे। इसे 48 किमी के दायरे में सुना गया। रांची और रंगून में भी ऐसे छोटे प्रसारण केंद्र स्थापित किए गए थे।

भारतीय राज्य प्रसारण निगम सेवा (ISBS) का जन्म अप्रैल 1930 को हुआ था। रेडियो का लाइसेंस शुल्क एकत्र करने का कार्य श्रम और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से डाक और तार विभाग को सौंपा गया था। 10 अक्टूबर 1931 को आर्थिक मंदी के कारण इसे भी बंद कर दिया गया था। फिर 23 नवंबर 1931 को जनता की भारी मांग पर इसका फिर से प्रसारण शुरू हुआ।

1935 में, मार्कोनी कंपनी ने पेशावर में 250 वाट का ट्रांसमीटर लगाया। ग्रामीण प्रसारण के लिए 14 गांवों का चयन किया गया और प्रसारण का समय प्रतिदिन शाम को एक घंटा रखा गया।

हमारे देश में रेडियो से पहला समाचार बुलेटिन 19 जनवरी 1936 को मुंबई से प्रसारित किया गया था। तब से, विकास यात्रा में हमारी उपलब्धियां इतनी महान रही हैं कि आकाशवाणी समाचार नेटवर्क आज दुनिया के प्रमुख प्रसारकों में से एक है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग तैंतीस सौ बुलेटिन प्रकाशित होते हैं, जिनकी कुल अवधि 36 घंटे से अधिक होती है।

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