Friday, October 7, 2022
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ओएलईडी OLED का फुल फॉर्म क्या होता है?

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी का तेजी से इस्तेमाल हो रहा है. जिसे समय-समय पर नई टेक्नोलॉजी के साथ-साथ नई चीजों भी लॉन्च हो रही हैं, भारत में सूचना प्रतियोगिता में बड़ी तेजी से परिवर्तन देखने को मिल रहा है. इसी के साथ  OLED का आगमन हो चुका है कई मोबाइल कंपनी इसका उपयोग कर रही हैं। आज हम OLED के बारे में बताएंगे, OLED  की फुल फॉर्म क्या होती है इसके बारे में बताएंगे ,तो चलिए आपको उसके बारे में बताते हैं.

OLED का फुल फॉर्म

आपको बता दें कि OLED  का फुल फॉर्म “Organic Light Emitting Diodes” होता है. हिन्दी में इसे कार्बनिक प्रकाश उत्सर्जक डायोड कहते हैं। आजकल OLEDका उपयोग मोबाइल टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीजों में ज्यादा किया जा रहा है, इसकी पिक्चर क्वालिटी एलईडी LED की तुलना में बहुत ही अच्छी होती है ,इसलिए आज के समय में कई कंपनियां इस टेक्नोलॉजी का ज्यादा उपयोग कर रही हैं. इसका उपयोग टीवी में करने से टीवी में कलर की गुणवत्ता बहुत ही अच्छी हो जाती है. इसे यूजर को बहुत ही अच्छा अनुभव होता है, इस टेक्नोलॉजी में एक कैथोड cathode  और एनोड anode का उपयोग किया जाता है.

OLED क्या है?

आपको बता दें कि यह एक प्रकार का डिस्पले टेक्नोलॉजी होती है. यह एलईडी LED  की एक सुधारात्मक रूप है इसके द्वारा पिक्चर क्वालिटी में बहुत ही अधिक सुधार किया गया है। OLED display डिस्प्ले बहुत ही पतली होती है. जिस कारण इमेज क्वालिटी image quality बहुत ही अच्छी दिखाई जाती है। इसमें सीरीज ऑफ ऑर्गेनिक फिल्म organic film को एक साथ रखा जाता है। इसके साथ ही इसमें सीरीज में दो कनेक्टर लगाए जाते हैं. जब इनकनेक्ट के बीच current  पास किया जाता है, तो प्रकाश निकलता है जिससे कि आपकी पिक्चर क्वालिटी बहुत ही अच्छी हो जाती है. एलईडी LED की तुलना में यह बहुत ही अधिक प्रभावी होता है.

How does OLED work?

OLED एक फ्लैट लाइट तकनीक है जिसमें दो कनेक्टर के बीच में जैविक पतली फिल्म की एक सीरीज को रखकर बनाया गया है, निर्माण के पश्चात जब इसमें उर्जा डाली जाती है, तब इसमें एक उज्जवल प्रकाश निकलता है, यह प्रकाश  स्क्रीन पर प्रदर्शित होता है। आजकल के समय में OLED का उपयोग डिस्प्ले display  और लाइट के निर्माण में किया जाता है इसमें एक कैथोड और एक एनोड का प्रयोग किया जाता है.

History of OLED

आपको बता दें कि इसका OLED आविष्कार 1987 में किया गया था . इसका उपयोग पहली बार ईस्टमैन कोडक में चिंग डब्ल्यू. टैंग और स्टीवन वैन स्लीके द्वारा किया गया था। उस समय से लेकर अभी तक इस में कई प्रकार के परिवर्तन किए गए हैं जिससे कि इसकी गुणवत्ता बहुत ही अच्छी हुई है इसके द्वारा हमें बहुत ही कम ऊर्जा का इस्तेमाल करके अच्छी पिक्चर क्वालिटी का मजा ले सकते हैं.

Basic Infrastructure of OLED

इसमें एक एमिसिव लेयर emissive layer को सैंडविच sandwiched किया गया है। इसमें एक कैथोड और एनोड का प्रयोग किया गया है. इसमें ऑर्गेनिक अणुओं Organic molecules का प्रयोग किया गया है. यह इलेक्ट्रॉन और होल्स को बढ़ाता है। एक साधारण OLED में छ:  layer का उपयोग किया जाता है। इसके ऊपर और नीचे की लेयर में प्रोडक्टिव क्लास की लेयर लगाई जाती है. ऊपर की लेयर को सील seal कहा जाता है। और नीचे की लेयर  को सब्सटेंस Substance कहा जाता है.

Read More: Resistance ko Hindi me Kya Kehte Hai

How is an OLED Panel Made?

OLED पैनल में सब्सट्रेट, बैकप्लेन, फ्रंटप्लेन substrate, backplane, frontplane और एक एनकेपुलेशन लेयर encapsulation layer का उपयोग किया जाता है. यह बहुत ही उत्तेजक exciting होता है. इसके साथ एनकेपुलेशन लेयर encapsulation layer भी बहुत अधिक उत्तेजक होती है. इसमें फ्रंटप्लेन डेपोज़िशन frontplane deposition बहुत ही यूनिक होता है। इसका साथ पैटर्न करने के लिए शैडो मास्क shadow mask  का उपयोग किया जाता है. यहां पर एक इंकजेट प्रिंटर का उपयोग किया जाता है. इसका उपयोग  OLED को जमा करने के लिए किया जाता है.

Types of OLED

1.TRADITIONAL OLED

2.LIGHT EMITTING POLYMERS

1.TRADITIONAL OLED: Traditional OLED में छोटे organic molecules का उपयोग किया जाता है. इन्हें glass के ऊपर लाइट उत्पन्न करने के लिए इकट्ठा किया जाता है.

2.LIGHT EMITTING POLYMERS: इसमें बड़े प्लास्टिक अणुओं large plastic molecules का उपयोग किया जाता है,जिन्हें पॉलीमर polymers कहा जाता है। इस प्रकार के ओएलईडी OLED को ही लाइट एमिटिंग पॉलीमर Light Emitting Polymers के नाम से जाना जाता है। इन्हें प्लास्टिक के ऊपर प्रिंट किया जाता है. इसलिए पतली और फ्लैक्सिबल होते हैं.

BENEFITS OF OLED

यह बहुत ही पतले होते हैं। यह हल्के और सुविधाजनक होती है. इन्हें आसानी से उठाया जा सकता है. यह अधिक ब्राइटर होते हैं ,इसलिए इन्हें बैक लाइट की आवश्यकता नहीं होती है. यह एलसीडी की तुलना में बहुत ही कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं। इसमें स्टेट होने के लिए किसी भी वार्मअप समय की आवश्यकता नहीं होती है.

Loss from OLED

इसके ऑर्गेनिक अणु organic molecules जल्दी खराब होने लगते हैं। यह पानी और नमी के प्रति बहुत ही संवेदनशील होते हैं। यह घरों की टीवी सेट में नहीं हो पाता है परंतु यह पोर्टेबल डिवाइस में अधिक होता है.

OLED OF FEATURES

OLED पतला और हल्का है क्योंकि इसमें बैकलाइट की आवश्यकता नहीं होती है।

  यह हल्के और पतले की कई परतों से बना है, इसलिए यह हल्का और बहुत लचीला है

यह आसानी से लचीला और रोल करने योग्य है, भविष्य में इसकी मदद से एक फोल्डेबल गैजेट बनाया जा सकता है।

OLED तकनीक बहुत कम बिजली की खपत करती है। इसलिए इससे बने पोर्टेबल डिवाइस, टीवी और मोबाइल की बैटरी लाइफ और बिजली की खपत बहुत कम होती है।

इस बिल्ट-इन गैजेट में शानदार कलर्स, इनफिनिट कंट्रास्ट, फास्ट रिस्पॉन्स रेट और वाइड व्यूइंग एंगल्स के साथ बेहतरीन पिक्चर क्वालिटी है।

इसे बनाने में बहुत कम खर्चा आता है।

OLED तकनीक पर बने पोर्टेबल डिवाइस तुरंत शुरू हो जाते हैं.

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